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02-16-2008, 03:51 AM
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RoyalRao Presents.......Biggest Hindi Sex Story Collection...{ UPDATE on P-85 }
WARNING THIS THREAD CONTAINS ADULT CONTENT!
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1.मौसी की धमाकेदार चुदाई
दोस्तो .ये कहानी आज से क़रीब १८ साल पहले की है..तब मै इंजीनियरिंग के अन्तिम वर्ष मे था, उस दिन रविवार था मेरे माता पिता और बहिन एक रिश्तेदार की यहाँ जाने वाले थे..मै उनके साथ नही गया..क्युकि मेरे टेस्ट चल रहे थे..वैसे पेरी तय्यारी पूरी थी..और ना जाने का कारण दूसरा ही था. दरअसल पिछले तीन दिनों से मै अपने लंड मे बहुत तनाव महसूस कर रहा था.. मेरे क़रीब सभी दोस्तों की गर्ल फ्रेंड थी और वो सेक्स का मजा भी लेते थे..लेकिन मै थोड़ा डरपोंक किस्म का था..इसलिए किसी लड़की से मेरी दोस्ती नही थी..और बाहर सेक्स करके बीमारी का खतरा था..सो मै उस दिन घर पर रूका .सबके जाते ही मै विडियो शॉप से एक इंडियन ब्लू फ़िल्म ले आया..लौटते वक्त अचानक बारिश शुरू हो गई मै पूरा भींग गया ..घर पहुंच कर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए..और बिल्कुल नंगा होकर फ़िल्म चालू कर दी..फ़िल्म इंडियन थी और उसमे नायिका भी देसी थी..साड़ी वाली फ़िल्म के शुरू मे चूमा चाटी के बाद फ़िल्म के हीरो ने लड़की की साड़ी खोलनी शुरू की..ये मेरा सबसे प्यारा काम था..मुझे साड़ी वाली औरतों को देख कर ज्यादा लंड सनसनाता है..फ़िल्म मे उस लड़की की बहुत अच्छे से चुदाई दिखाई थी जिसे देख कर मेरा लंड भी फन फनाकर उछल रहा था..मै उसे हाथ से सहलाता रहा..इसी तरह पूरी पिक्चर मैंने देख ली.. अब मै अपने लंड को जोर जोर से हिला रहा था..उसी वक्त दरवाजे की बेल बजी..मै डर गया..जल्दी से टीवी बंद किया मेरा बाथ रॉब पहना और लंड को दबाते हुए दरवाजे के पास आया...फ़िर दरवाजा खोला..
दरवाजा खोलने के बाद मेरे होश उड़ गए..सामने मम्मी की कजिन याने मेरी मौसी खड़ी थी..शायद वो कही आस पास ई थी और बारिश मे भीग गई थी..उनकी उमर ज्यादा नही सिर्फ़ ३८ साल की थी..लेकिन वो उतनी लगती नही थी..मेरे साथ तो उनका मजाक का भी रिश्ता था..उनकी १२ साल की एक लड़की थी और वो ख़ुद तलाकशुदा थी..वैसे तो मम्मी की बहिन होने के नाते मेरी मौसी ही थी..लेकिन आज उन्होंने हरे रंग की जो शिफान की साड़ी पहनी हुयी थी वो पानी से उनके पोर्रे बदन से चिपकी हुयी थी और उनके छरहरे बदन को उजागर ही कर रही थी..शरीर हा हर कटाव हर गोलाई साफ नजर आ रही थी..और इसने मेरे लिए आग मे घी का काम किया.., उन्होंने कहा वो किस इंटरव्यू मे जा रही है.. और ये नौकरी उनके लिए बहुत जरुरी है..इसलिये वो कपड़े बदलना चाहती है..उनके ब्लाउज के अन्दर से काली ब्रा साफ नजर आ रही थी, वैसे तो उनके मम्मे मुझे कभी ख़ास नही लगे लेकिन आज वो मुझे बुला रहे थे..ब्लाउज पुरा गीला हो चुका था, और चुन्चियो के निपल भी अपनी मौजूदगी का अहसास दिला रहे थे..मेरा लैंड काबू से बाहर होता जा रहा था..जिसे मैंने दबाये रखा था..
वो सीधी बाथरूम की तरफ़ जाने लगी..मैंने देखा उनके मांसल नितम्ब मटकते हुए हिल रहे थे..गांड का कटाव उफ़.. और वो पतली सी कमर..दिल कर रहा था अभी जा के पीछे से जकड लूँ..और चूमते हुए उन्हें बेडरूम मे ले जाकर जबर्दस्त चुदाई कर दूँ..मई जनता था की मेरे मन मे ग़लत और गंदे ख्यालात आ रहे है..लेकिन..शायद उन्हें भी मेरे सामने इस तरफ़ थोड़ी शर्म आई होगी..लेकिन लेकिन मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था..अब तो सिर्फ़ लंड ही सोच रहा था..और उसे चूत के सिवा कुछ नही सूझ रहा था.. तो क्या ग़लत है और क्या सही ये मुझे समझ मे नही आ रहा था..
जैसे ही उन्होंने बाथरूम मे जा कर दरवाजा बंद किया..मैं सोचने लगा की मौसी नंगी होने से कैसी दिखाती होगी..और ये सोच कर ही लंड उछल पडा..किसी तरह उसे दबाया फ़िर आंखो के सामने उनकी नोंकदार चुंचिया आ गई..दिल कर रहा था की काश उन्हें पीछे से पकड़ लूँ और सामने हाथ बढ़ा कर मम्मे दबाऊ..फ़िर बिस्तर पर नंगी कर के अच्छे से चुदाई करूं ..मैंने आज से पहले उन्हें इस नज़र से कभी नही देखा था..आज मैं सारे रिश्ते भूल गया था मेरे सामने वो एक मादा थी और मैं एक कामांध नर जो उन्हें मसल के चोदना चाहता था..मेरी सोच जारी थी..
तभी वो बाथरूम से सिर्फ़ एक टॉवेल लपेट कर बाहर आई..जो की काफी छोटा था..और हमेशा बाथरूम मे टंगा रहता था..उसमे उनकी आधी चुंचिया ही ढँक पाई थी..उसके बीच की घाटी साफ दिखाई दे रही थी..और नीचे कमर से थोड़ा नीचे का भाग ढंका हुआ था.उनकी चूत से थोड़ा ऊपर तक..उनकी चिकनी और बाल रहित जान्घे और पैर एकदम खुले थे..मैं इस ख़्याल से ही रोमांचित हो गया की घर मे हम दोनों हे अधनंगे और अकेले थे..उनके बदन के हर अंग से सेक्स बरस रहा था..मैं मंत्रमुग्ध हो कर उनके इस अधनंगे हुस्न को निहार रहा था..
Continue.....
Last edited by royalrao; 12-04-2008 at 02:26 PM.
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02-16-2008, 03:53 AM
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उनकी गोरी त्वचा और उसकी चिकनाई जैसे सिल्क का एक चादर हो..वो मेरे सामने खड़ी हुई और टॉवेल को एक हाथ से पकड़ा फ़िर मुझसे कहा की ,अम्मी के कप बोर्ड से एक ब्लाउज , ब्रा और साड़ी उन्हें निकाल के दूँ..
जहाँ खड़ी हो कर वो मुझसे बात कर रही थी वहीँ कोने मे एक लंबा मिरर लगा हुआ था और मैं उसने उनके दूधिया चूची को साइड से देख रहा था..मुझे उनके गहरे भूरे रंग के निपल भी दिख रहे थे..मैंने देखा उनके मम्मे एकदम एवरेज साइज़ के थे..और अभी तक लटके नही थे.. लेकिन बहुत ही गोलाई मे थे..मैंने उन्हें पूंछा और कुछ चाहिए..?
उन्होंने कहा उन्हें पैंटी भी चाहिए..लेकिन मेरी मम्मी की पैंटी उन्हें फीट नही होगी क्युकी मम्मी की गांड उनसे बहुत बड़ी है..चूँकि वो मुझसे खुली बात करती थी इसलिए ये बात उन्होंने हंसते हँसते मुझसे कही.और वो मुझे अभी भी अपने भांजे की नजर से देख रही थी..
लेकिन मैं आज उन्हें मौसी की नजर से नही देख पा रहा था..मेरे सामने तो बस एक औरत का जिस्म था आधा नंगा उफ़ उनके बदन की को मादक गोलाईयां नितम्बो का वो उभरापन स्तनों के बीच की घाटी..और केले के खंभे जैसी चिकनी गोरी गोरी जांघें ..ये नज़ारा देख कर मेरा लंड काबू से बाहर होता जा रहा था.. उस आईने मे मैं उन्हें नंगा ही कर चुका था..उन्हें मैं इस तरह देख रहा हु ये शायद अभी तक उन्होंने सोचा भी नही था..मैं अपनी मम्मी के कपबोर्ड के तरफ़ गया और साड़ी और ब्लाउज तो निकला लेकिन ब्रा मुझे वहाँ नही मिली..मैंने उनके तीन ब्रा धुलाई के कपडो के साथ देख चुका था..दरअसल मम्मी अपनी पैंटी और ब्रा किसी दुसरी जगह रखती थी जो मुझे मालूम नही थी..मैंने ऊपर के खाने मे टटोला तो उनकी पुरानी ब्रा और कुछ पुराने कपडे दिखे, जो की वो कभी पहनती नही थी,
और ये ब्रा बहुत ही पतले कपडे की थी उसका स्ट्रेप बहुत छोटा सा था और उसका एलास्टिक भी ख़राब हो चुका था..., मैंने वो मौसी को दिए मैं बाहर आ गया..थोड़ी देर मे मौसी ने मुझे बुलाया और दिखने लगी की वो ब्रा उनके शरीर पर कैसी लग रही है..उन्होंने ब्रा पहन रखी थी..और हंस रही थी..असल मे वो उन्हें ढीली हो रही थी और उनकी चुन्चियों से नीचे लटक रही थी..पूरी चुन्ची खुली थी सिर्फ़ घुन्डियाँ ढकी हुयी थी...वो भी ब्रा के उपरी भाग के टिके हुए रहने के कारण
ये देखकर मैं सच मे गरम हो गया..और लंड लोहे के रॉड जैसा सख्त हो गया.. मेरे होंतो पर नकली हँसी लाते हुए मैं खडा रहा..उन्होंने कहा की पहले मेरी मम्मी और उनके ब्रा साइज़ एक से थे..उनके 36 C थे मौसी के 36 D
उन्होंने हँसते हुए कहा "शादी के बाद तुम्हारी मम्मी ने बहुत ज्यादा सेक्स का मजा लिया लगता है..इसीलिये उसके साइज़ 42d हो गया है " ये सुन कर मैं एकदम संन्न हो गया क्युकी आज से पहले इस तरह की बात उन्होंने मेरे साथ कभी नही की थी
वो शायद भूल गई की वो आधी नंगी खड़ी है और मैं एक जवान लड़का हूँ...मेरे मुह मे पानी आने लगा उनका ये हुस्न देख कर..थोड़ी देर बाद मैं अपने बहन के कप बोर्ड से ३४ साइज़ के ब्रा उन्हें ला दी उन्होंने उसे मेरे सामने ही पहना और कहा "ये फ़िर भी ठीक है, क्युकी ये कम से कम इन्हे पकड़ कर तो रख सकती है, और जानते हो मुझे ऐसा लग रहा जैसे कोई इन्हे दबा रहा है.." ये सब सुन कर तो मैं अपने आप पर काबू नही रख पा रहा था..मैं मेरे लंड के झटके अब नही सम्हाल पा रहा था. मेरा 7.5 इंच का लंड मैं कैसे छुपाऊं ...और मैंने सिर्फ़ मेरा बाथरोब लपेटा हुआ था.. जो की सामने से खुला हुआ था..मैंने दोनों पैरों को एक के ऊपर एक रखा और सोफे पर बैठ गया..अब उह्नोने कपडे पहन लिए और जाने के लिए तैयार हुई और मुझसे कहा की दरवाजा बंद कर लो..जैसे ही मैं उठा..मेरा लंड उछल कर बाहर आ गया..और उसने मेरे कड़क लंड को देखा जो की उनके तरफ़ निशाना ले रहा था..मैं थोड़ा सा निराश हो गया..उन्होंने कहा.. कोई बात नही अब मैं जा रही हूँ तुम अकेले हो चाहो तो दिन भर नंगे रहो कोई नही देखेगा..और एक अज्ज़ब से मुस्कराहट बिखेर कर चली गयी.
Continue...............
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02-16-2008, 03:55 AM
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जैसे ही वो निकल गई मैंने दरवाजा बंद किया और फ़िर से वोही फ़िल्म चालू कर दिया और अपने लंड को हिलाने लगा..और फ़िर आज तो मैंने एक औरत की चूची और उसके नितम्ब और चिकने सेक्सी पैरो को देखा था..इसलिये मेरा लंड और ज्यादा कड़क हो रहा था, जैसे ही मैं झड़ने के क़रीब आया मुझे याद आया की मौसी के कपडे तो बाथरूम मे ही है.. मैंने लंड हिलाना बंद किया ..मेरे भीतर क्या हो रहा था ये आप समझ सकते है..इतने बार झड़ने के क़रीब आकर मैंने मूठ मरना रोका..मेरे भीतर लावा भड़क रहा था बाहर निकलने के लिए..मैं जल्दी से बाथरूम मे गया..और उसकी पैंटी और ब्रा को ले कर आया मैंने पैंटी को सूंघा बड़ी ही कामोत्तेजक सुगंध थी. उसमे बीच मे एक पीलापन था.जिस जगह उसकी चूत और गांड रहती है वहीँ पर..ब्रा मे भी पसीने की और पाउडर की मिली जुली खुशबू थी..मुझे ऐसा लगा मैं सच मे उसके मम्मे की खुशबू ले रहा हूँ.. मैंने उसकी पैंटी पहन ली उसके उस पैंटी के अन्दर मेरा खड़ा लंड टेंट बनाये हुए था..और वो मैंने आईने मे देखा..और मैं उसे वैसे ही मसलने लगा ..और उसकी पैंटी मे मैंने अपना पूरा माल निकाल दिया..पूरी पैंटी भर गई...मैं काफी देर से उत्तेजित था..इसलिये मेरा माल भी बहुत सारा निकला.. थोड़ी देर मैं वही पलंग पर लेटा रहा ..
लेकिन उठाने के बाद मुझे थोड़ी शर्म महसूस हुई और ग्लानी भी हुई..मुझे डर लगने लगा...मैं नही जनता था की पैंटी की ये हालत देख कर मौसी क्या सोचेंगी..क्या मेरे मम्मी डैडी से सब कह देंगी या मुझे झापड़ मरेंगी..और फ़िर कभी बात नही करेंगी..ये सब ख़्याल मेरे दिमाग मे आ रहे थे..मैंने दोनों को (पैंटी और ब्रा) पलंद के ऊपर सूखने के लिए रखे और पंखा तेज चला दिया..तभी मेरे मम्मी का फोन आया..उन्होंने सब ठीक है या नही ये पूंछा फ़िर कहा की वो लोग कहीँ और भी जाने वाले है और थोड़ी शॉपिंग भी करनी है इसलिये रात मे देर से लौटेंगे
इसके बाद मैं अपनी बेवकूफी के बारे मे सोचने लगा..क़रीब एक घंटे के बाद मौसी वापस आई. वो काफी खुश थी.उन्होंने बताया की उन्हें वो जॉब मिल गया है..मैंने उनकी तरफ़ देखा तो उनके ऊपर कुछ कीचड के छींटे दिखे..मैंने पूंछा ये कैसे हुआ ? उन्होंने कहा ..एक मोटरसाइकिल वाले ने तेजी से जाते हुए ये किया है..और अब वो नहाना चाहती है.
उन्होंने कहा की वो गरम पानी से नहायेंगी क्युकी बारिश गिरने से माहौल भी ठंडा हो गया था..इसलिये गिज़र चालू कर दूँ मैंने कहा गिज़र तो ख़राब है..उन्होंने कहा मैं बाथरूम मे हूँ तुम गैस पर पानी गरम कर के मुझे ला दो. मैंने गैस पर पानी गरम किया और फ़िर एक बाल्टी मे दाल कर बाथरूम के दरवाजे को खटखटाया ..उन्होंने दरवाजा खोला और कहा की अन्दर ला के रख दो..क्युकी मेरे कमर मे दर्द है और मैं बाल्टी नही उठा सकती..अब मेरा लंड फ़िर से खड़ा होने लगा..मुझे मालूम था की वो अन्दर किस हालत मे होंगी..और बाथ रूम का दरवाजा खोलते ही बांये तरफ़ कमोड था और कमोड की तरफ़ मुह किया तो दाहिनी तरफ़ नहाने की जगह थी..इसका मतलब मुझे बाल्टी अन्दर तक ले जाना था.. मैंने फ़िर पूंछा क्या मैं अन्दर आ जाऊं ? उन्होंने कहा ये तो तुम मेरी मदद करने के लिए कर रहे हो..मैं अन्दर घुसा..ऊफ्फ वो अन्दर पूरी नंगी थी..लेकिन दुसरी तरफ़ के दीवार के पास खड़ी थी..उनका चेहरा दीवार की तरफ़ था और एक हाथ से वो अपनी गांड के छेद को ढांके हुई थी..मैं मुड़ा लेकिन उनके मस्त सेक्सी निताम्बो को देखने से ख़ुद को नही रोक पाया..अब मैंने सोच लिया की अगर आज नही तो कभी नही..मैं अपने घुटनों के बल झुका और मेरा एक हाथ उनके चिकने गोरे जांघों पर फेरते हुए उनकी चूत तक सहलाया..उनकी चूत एकदम चिकनी थी..एक भी बाल नही था..और फूली हुयी चूत थी..मेरे हाथों ने चूत की दरार को महसूस किया..बिल्कुल किसी कुंवारी की कसी हुयी अनचुदी चूत जैसी चूत थी उनकी..ये सब मैंने अचानक किया और उन्हें कुछ सोचने का टाइम भी नही मिला..उन्हें तो जैसे बिजली का झटका लगा और क़रीब १० सेकेंड के बाद उनके मुह से सीत्कार निकली. सी सी स् .स्.स्.स्.स्..स्.और उनकी साँस भारी हो गई.. उन्होंने सिर्फ़ आह्ह ..संजू..उफ़..ना..कर..इतना ही कहा..मैं सहलाता रहा
अब उन्होंने पीछे देखा और कहा संजू मैं तेरी मौसी हूँ..ये ठीक नही है..आह्ह्ह.., लेकिन मैंने उनकी बात को सुनी अनसुनी कर दी.. उन्होंने मुझे हटाने का कोई प्रयास नही किया..लेकिन मेरा सहस बढ़ते देख उन्होंने अपनी गांड से मुझे पीछे धकेला मैं बाथ रूम के फर्श पर गिर पड़ा और तब मैंने उनकी मस्त निताम्बो और गांड का पूरा नज़ारा देखा..नितम्ब जैसे दो पहाड़ थे और और गांड का गुलाबी छेद उसके बीच मे , उसपर चारों तरफ़ थोड़े बाल थे..लेकिन वो हलके हलके से.मुझे धकेल कर वो रुकी नही.. बाथरूम से निकलकर वो सीधे उस कमरे मे आई और बेड पर बैठ कार अपनी पैंटी उठाकर पहनने लगी, मैं अब काफी गरम हो चुका था और इस अधूरे मोहीम मे खतरा भी था..किसी भी तरह मौसी की चुदाई तो करना ही था..मैंने अपना बाथरोब निकाल दिया और मेरा फनफनाता ७.५ इंच का लंड हिलाते हुए उनके पास पहुँचा , वो पैंटी पहनने के लिए झुकी थी..मैंने उन्हें वैसे ही बेड पर धकेल दिया अचानक हमले से वो बेड पर गिर पड़ी..
उन्होंने पैंटी आधी ही पहनी थी सिर्फ़ घुटनों तक..मैंने दोनों हाथ पकड़ कर उन्हें बेड पर इस तरह लिटाया था की उनके पैर जमीन पर लटक रहे थे..और बाकी का हिस्सा बेड पर था..पीठ के बल ,,ओह्ह..मैंने अपनी जिंदगी मे पहली बार चूत के दर्शन किए..असली चूत..वैसे तो ब्लू फ़िल्म मे देख चुका था..लेकिन ये तो उनसे भी ज्यादा प्यारी चूत थी..एक नंगी चूत..मेरा लंड तो आपे से बाहर हो गया..थोड़ी देर पहले मैंने इसी चूत को सहलाया था..लेकिन तब मुझे सामने का ये खूबसूरत नज़ारा नही दिखा था..मैंने मेरा मुँह उनके मस्त चुंचियों के बीच मे घुसेड दिया..और मेरे नाक से उन्हें गुदगुदाने लगा वो अपने पैरो को जोर से पटकते हुए छुड़ाने की कोशिश कर रही थी..उसने कहा..संजू..ये ग़लत है..मैं तुम्हारी मौसी हूँ..मुझे ख़राब मत करो..लेकिन मैंने एक ना सुनी..अब मैंने उनके अंगूर जैसे निपल को मुँह मे ले लिया..और दोनों को बारी बारी से चूसने लगा..अब उनके पैर पटकने की स्पीड भी कम होने लगी थी..लेकिन वो कह रही थी..प्लीज़ संजू..आह्ह..मुझे छोड़ दो..उफ़..आह्ह.., अब मैंने उनके निप्पल को हलके से काटना शुरू किया दांत गडाते हुए.. अब वो भी गरम होने लगी थी..क्युकी उनके निपल अब कड़े होने लगे थे..और मैं मुँह मे ले कर चूसे जा रहा था..अब उन्होंने विरोध करना पूरी तरफ़ बंद कर दिया और आँख बंद कर के अआछ..ऊह्ह..चुस्सो..जोर से दबाओ..हाय..स्.स्.स्.स्.स्..संजू..जू.जू..और मेरा सिर अपने चूची पर दबाने लगी..थोड़ी देर के बाद उन्होंने मेरा सिर ऊपर किया और कहा..अब इन्हे चूसना बंद करो और मेरी चूत का ख़्याल करो.. .ये बहूत दिनों से प्यासी है..मैंने उन्हें ठीक से लिटाया..घुटने मोड़ दिए और उनके चूत पर मुँह रखा..आह्ह्हा क्या सुगंध और क्या स्वाद था..उनकी चूत ने जूस निकालना शुरू कर दिया था..और बहूत गीली थी..मैंने अपनी जीभ उनकी चूत के फांक को फैलाकर अन्दर डाली ..चूत अभी भी गुलाबी थी..और एकदम टाईट जैसे ही मैंने जीभ अन्दर डाली (ये मैंने ब्लू फिल्मो से सिखा था) वो सिसिया उठी..हाय..उफ़..तुमने ये क्या कर दिया संजू....और मैं उनके चूत मे जीभ घुमा रहा था तभी उन्होंने मेरे लंड को पकड़ लिया..और कहा..बाप रे..तुम्हारा तो बहुत लंबा और मोटा है..इतना लंबा तो तुम्हारे मौसा का भी नही था और न तुम्हारे डैडी का ..(मैं तो समझ नही पाया..तो क्या डैडी मे भी मौसी को चोदा है?) मैंने उनसे पूंछा तो उन्होंने कहा हाँ मेरी शादी के पहले एक बार तेरे डैडी ने मुझे चोदा था और इसी लिए स्नेह मेरे पेट मे थी शादी के वक्त और ये जानकर तेरे मौसा ने मुझे डाइवोर्स दिया लेकिन उसके बाद मैं आज चुदवा रही हूँ.." मैंने कहा इसीलिये तुम्हारी चूत इतनी टाईट है..उन्होंने कहा हाँ बेटे..लेकिन तेरा लंड तो मूसल है..इतना मोटा लंड..मैंने नही देखा कभी..और उन्होंने मुझे अपने ऊपर खीचा मेरे लंड को चूमा और चाटा फ़िर अचानक मेरे सुपाडे को मुँह के अन्दर ले लिया और चूसने लगी..अब हम 69 के पोज़ मे थे मैं पागलों की तरह उनकी चूत को चाट रहा था..लंड चटाने से मैं तो एकदम जोश मे आ गया था..मेरे चूत को चाटने की स्पीड बढ़ गई जीभ से उनके दाने को भी मैं छेड़ रहा था..वो भी उभर कर ऊपर निकल आया था...मेरा चेहरा उनके जांघों के बीच मे था.. अचानक...उन्होंने मेरे सिर को अपनी जाँघों के बीच जोर से दबा लिया और आह्ह..ओओओह..हाय..ऊफ्फ.जैसी जोरो से चिल्लाने की आवाज़ .करते हुए अपनी चूत मेरे चहरे पर चिपकाने लगी..कुछ झटके लिए और मैंने मेरे मुँह मे उनकी चूत से गरम गरम कुछ लिसलिसा तरल पदार्थ आने लगा..जो की मेरे पूरे चहरे मे लग गया था मैंने भी उन्हें जोर से जकड लिया और जितना चाट सकता था पूरा चाट लिया..अब वो शांत हो गई..मेरे सिर को भी छोड़ दिया..और मेरी तरफ़ देख कर शर्माते हुए कहा "सॉरी" मैंने पूंछा "किस लिए सॉरी " उन्होंने कहा मेरा पूरा पानी मैंने तुम्हारे मुँह मे डाल दिया मैं तुमसे कह भी नही पाई की मैं अब झड़ने वाली हूँ ..क्या करूं आज कितने सालों के बाद चूत पर किसी मर्द ने हाथ लगाया है..मैं अपने आप को रोक नही सकी झड़ने से" मैंने कहा..मुझे तो ये बहुत अच्छा लगा.. . मैं तो फ़िर से ऐसा करना चाहूँगा..तुम्हारे चूत का पानी मुझे बहुत अच्छा लगा..
Continue............
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02-16-2008, 03:56 AM
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उन्होंने कहा "संजू अब मत तड़पाओ और तुम्हारा ये मोटा लंड मेरी चूत मे डाल के मेरी अच्छे से चुदाई करो..तभी मेरे चूत के अन्दर की आग बुझेगी जो तुमने आज दोपहर से लगाई है.." मैंने पूंछा "दोपहर से?
"हाँ" जाते वक्त तुम्हारे इस मोटे लंड की झलक मैं देख चुकी थी..इसीलिये तो मैं फ़िर से वापस आई..और तुम्हे बाथ रूम मे भी इसी लिए बुलाया " मैंने पूंछा फ़िर वहाँ से भाग कर क्यों आ गई..?" "वो तो तुम्हे और भड़काने के लिए आई." उसने कहा..
"लेकिन अब तुम ये मोटा और लंबा लंड मेरी चूत मे डाल दो."
मैंने उससे कहा की अब वो पेट के बल लेट जाए और उसके पेट के नीचे एक तकिया लगा दिया..उसकी गांड पीछे से ऊपर उठ गई थी..क्या नितम्ब और गांड थे..मैं तो गांड पर हाथ फेरने लगा..उसे चूमा..फ़िर गांड के छेद पर भी किस किया..जीभ से उसकी पीठ और दोनों नितम्बो के बीच की दरार मे गिला करने लगा..वो भी गरम होने लगी थी..मैंने उसके बालों को हटा कर गर्दन के पास चूमा और जीभ से छठा भी फ़िर उसके कान के नीचे और कान पर भी ऐसा ही किया..वो कसमसाने लगी मैं नीचे आया और गांड से होते हुए उसकी चूत को सहलाया..उन्होंने अपने घुटने थोड़े मोड़ लिए जिससे चूत पीछे की ओर उभर आई...अब वो डॉगी स्टाइल मे थी मैंने उनके गोरे गोल्गोल नितम्बो को दोनों हाथों से पकड़ा ..दबाया फ़िर गांड के छेद मे जीभ लगाया और अन्दर करने लगा..वो थोड़ा हिली..और आह..इश..स्.स्.स्.स् मैंने वह चाटना शुरू किया वह का भाग बड़ा ही नमकीन था शायद पसीने की वजह से ..मैंने गांड के छेद को फैलाया..और उस छोटे से गुलाबी छेद मे जितना हो सके मैंने जीभ अन्दर कर दिया..अब उसने चिल्लाते हुए कहा तुम्हे मेरी गांड पसंद है तो मुझे पहले चोद क्यों नही लेते.... तुम मेरी गांड को चाटो लेकिन मेरी चूत मे ऊँगली करो..बहुत खुजलाहट हो रही है ..मैंने उनके कहे अनुसार अपनी एक ऊँगली उनके चूत मे डाल दी..चूत से अभी भी रस निकल रहा था उसकी को मैं गांड के छेद मे लगा कर चाट रहा था..और उनके चूत के दाने को भी मसल रहा था..
हम दोनों ही काफी गरम हो चुके थे..उसने कहा संजू मेरी गांड मारोगे ? नेकी और पूंछ पूछ मैंने कहा हाँ..उन्होंने कहा तुम पहली बार कर रहे हो इसलिये पहले मेरी कुंवारी गांड को खोलो फ़िर मेरी चूत का मजा लेना..तुम अपनी मम्मी के ड्रेसिंग टेबल से वसलिन ले आओ और अच्छे से तुम्हारे लंड पर और मेरी गांड के छेद मे लगाओ " मैंने वैसा ही किया..उसने मेरे लंड को चूमा और अच्छे से वसलिन लगाया फ़िर मैंने उसे उसी पोजीशन मे किया और मेरे लंड के सुपाडे को गांड के छेद पर टिका के एक धक्का दिया चिकनाई की वजह से लंड का सुपाडा तो अन्दर चला गया लेकिन मौसी चीख . उठी..आह्ह ..मार डाला..उफ़ मर गयी..कितना मोटा है..इतने जोर से डालते है. मैंने उनके कमर को पकड़ रखा था और उनकी चीख के बावजूद मैंने दुसरे धक्के मे पूरा लंड जड़ तक अन्दर घुसेड दिया..मौसी की आंखों से आंसू निकल आए..चेहरे पर दर्द था और चीख अलग..ऊह माँ ..थोड़ा रुकने के बाद मैंने धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर करना शुरू किया..मैंने एक हाथ से उनके चुन्चियो को भी दबाना जारी रखा और फ़िर उनकी चूत मे ऊँगली अन्दर बाहर करने लगा..मैंने धक्को की स्पीड बढ़ा दी..मेरे हर धक्के से उसकी गांड कंप जाती थी और मैं लंड को बाहर खीच कर पूरा अन्दर पेल रहा था..वो इससे कभी कभी चिल्ला उठती थी..तब मैं अपनी स्पीड कुछ धीमी कर देता..लेकिन मैं घमासान धक्के लगाये जा रहा था..वो सिर्फ़ आह..ओओओह. .मम्..मम्.म.म. इश..स्.स्.स्. की आवाज़ निकल रही थी..मैंने महसुसू किया की उनकी चूत मेरे ऊँगली को कस के जकड रही है..और फ़िर क़रीब 5 मिनिट बाद ही मौसी ने मेरे हाथ मे ही पानी छोड़ दिया..मेरा पूरा हाथ भर गया..मैंने उसे चाट लिया और तेजी से गांड मारना जारी रखा..लेकिन वो थोड़ी देर शांत रही और कहा.."संजू..अब मैं लंड को चूत मे लूंगी..मैंने कहा ठीक है ..मैंने लंड बाहर निकाला तो उन्होंने कहा "अब तुम लेटो,..उन्होंने पास पड़ी अपनी पैंटी से मेरे लंड को पोंछा और उसे मुह मे ले लिया.मुह मे ले कर उसे चूसने लगी..दरअसल गांड मरते हुए मैं भी झड़ने के क़रीब आ चुका था, वो इस तरह से चाट और चूस रही थी की मैं अपने को नही रोक पाया और उनके सिर को पकड़ कर पूरा लंड अन्दर गले तक पहुंचाने लगा..मैंने कहा..मेरा.निकलने वाला है..ओह..ओह..और जैसे ही मेरी पिचकारी की धार उनके गले तक पहुँची उन्होंने मेरा लंड बाहर निकाला लेकिन अब तो एक के बाद एक जोरदार पिचकारी निकल रही थी जो उनके पूरे चेहरे पर फ़ैल गई... थोड़ा तो उन्होंने चाट लिया और फ़िर अपने मुँह को पोंछा..मेरी तरफ़ देख कर मुस्कुराई.. और कहने लगी..तुम्हारा तो माल भी बहुत निकलता है..और कितना गरम है..उन्होंने मेरे लंड को नही छोड़ा ..हाथ मे ले कर मसलती रही..ऐसे ही २० मिनिट हम सोये रहे..फ़िर उन्होंने उठ कर मेरे लंड को फ़िर से चाटना शुरू कर दिया..मैंने भी उनकी चूत के दाने को और चूत को छेड़ना शुरू कर दिया..निपल को मुह मे लिया..दबाया..इस तरह वो फ़िर से गरम होने लगी और मेरा लंड फ़िर से चुदाई के मैदान मे कूद पड़ा.. अब उन्होंने पास पड़ी शीशी से .फ़िर वसलीन ले कर लगाया....मैंने पूंछा अब क्यों ? उन्होंने कहा "मुझे क्या मरना है बिना वसलीन लगाए ये मोटा और लंबा लंड अन्दर लेकर..ये वैसे ही आज मेरी चूत को फाडेगा ..लेकिन मैं बेचैन हूँ..इसे मैं अपनी मरजी के मुताबिक़ अन्दर लूंगी"..और मुझे पीठ के बल लिटा दिया .फ़िर मेरे कमर के दोनों तरफ़ पैर रख कर चूत को मेरे चिकने लंड के ऊपर लाई और अहिस्ता उस पर बैठ गई मैंने उनके मम्मे हाथ मे लिए..मैं अधलेटा हो गया ताकी चूचियों का मजा ले सकूं..
मैं हैरान था की मौसी जो की इतनी शांत रहती थी आज इस तरह क्यों कर रही है..असल मे चुदवाने या चोदने की इच्छा हर मर्द और औरत मे रहती है..सिर्फ़ उसे सही तरीके से गरम करना या तैयार करना ही कठिन है..और मैंने अनजाने मे ये काम कर लिया था.., वो मेरे लंड पर बहुत धीरे धीरे ऊपर नीचे हो रही थी..अभी आधा लंड भी अन्दर नही लिया था..ज़्यादातर वो लंड को चूत के दाने पर ही घिस रही थी..उनकी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था..इसलिए लंड भी थोड़ा आसानी से अन्दर बाहर हो रहा था लेकिन वो पूरा लंड अन्दर लेने की हिम्मत नही जुटा पा रही थी..लंड भी चूत मे एकदम कसा कसा जा रहा था..अब मैंने उनके चूतादों के नीचे हाथ लगा कर उसे कस के पकड़ा और जब वो नीचे की ओर आई तो मैंने अपनी कमर जोर से उछाल दी और गप्प से पूरा लंड अन्दर चला गया और सीधा उनके बच्चेदानी से टकराया..वो भी अपना बैलेंस नही सम्हाल पायी और उनकी गांड का पूरा वजन मेरे लंड पर आया..जिससे लंड और अन्दर तक धंस गया,,और उनके मुह से आइईई...मर गई.ई.ई.ई.ई..ई.ई.ई.ई. की जोरदार चीख निकली..वो मेरे सिने पर लेट गई..मैंने उन्हें अपने बाँहों मे जकड लिया..अब पूरा लंड अन्दर घुस चुका था..मैंने ही पहले नीचे से कमर हिला कर धक्के लगाने शुरू किए..और फ़िर वो भी अपने पंजो के बल बैठ गई और लंड को अन्दर बाहर करने लगी..बीच बीच मे मैं जोर से नीचे से धक्का देता तो लंड फ़िर बच्चेदानी से टकरा जाता था..इस तरह क़रीब १५ मिनिट मे ही मौसी ने फ़िर से अपने पानी से मेरे लंड को स्नान करवाया मैंने उनकी कमर पकड़ कर उन्हें अपने नीचे ले लिया चूंकि वो झाड़ चुकी थी इसलिये थोड़ी देर वैसी ही शांत रही फ़िर उसने भी कमर हिलाना शुरू किया..मैंने उसकी गांड के नीचे एक तकिया लगाया चूत उभर आई , उसके पैरों को सिर तक मोड़ दिया और उसके बाद मेरे तूफानी दक्कों ने मौसी की चूत के चक्के चुदा दिए..मैं पहले दो बार झाड़ चुका था इसलिए अब मैं जल्दी झड़ने वाला नही था..मेरे धक्को के बीच फ़िर से मौसी ने मुझे चिपटा लिया और आह्ह..संजू..मैं झाड़ गयी..ओह..चो..चोद मुझे..फाड़ दे मेरी चूत को..अब मेरे लंड मे तनाव अने लगा था..वो फ़िर से फूलने लगा था..मैंने कहा मैं झड़ने वाला हूँ..बाहर निकालू या अन्दर ही डालूँ..उसने कहा..अन्दर ही डालो..मैंने बहुत दिन से चूत के अन्दर नही डलवाया है..और इतने अन्दर तक तो आज तके मेरी चूत मे कोई चीज़ नही घुसी.. मैंने कहा..प्रेगनंट..हो गई तो..? " उसकी फिकर तुम मत करो मैं गोली खा लूंगी..तुम चोदो..आह्ह..उफ्फ्फ. क्या मस्त लंड है..संजू तुम मेरे घर आ कर मुझे जब चाहे चोद सकते हो..मैं तुम्हारे लंड की दीवानी हो गई हूँ.."और ना जाने क्या क्या बोल रही थी..मैं तो धक्के लगाने मे मशगूल था..और फ़िर मेरी पूरी ताकत सिमट गई और पूरा लंड जड़ तक अन्दर डाल कर मैं उसके छाती पर लेट गया..और मेरे लंड ने अपना फौवारा उसकी चूत मे छोड़ दिया..पूरी चूत भर गई..उसकी गरमी से मौसी भी एक बार फ़िर मुझसे चिपक कर झड़ने लगी..इस तरह अब हम दोनों एक साथ ही झड़े ..क़रीब बीस मिनिट हम ऐसे ही सोये रहे मौसी ने कहा संजू मुझे अब जाना है..चलो उठो..मैं उठा और मैंने लंड को , जो की अब सिकुड़ गया था ..बाहर निकाला..मैंने देखा उनकी चूत जो पहले सिर्फ़ एक दरार थी अब खुल गई थी और उसने से मेरा और उसका दोनों का पानी बह कर उसकी गांड से होते हुए चादर पर टपक रहा था..
उसके बाद हम दोनों ही उठ कर बाथरूम मे गए वहाँ से आकार उसने पानी गरम किया और फ़िर से दोनों ने एक साथ नहाया..और नहाते वक्त मैंने कमोड के ऊपर बैठ कर उसे मेरे लंड की सवारी करवाई..उसे ये बहुत अच्छा लगा..दोनों ने एक दुसरे को अच्छे से साबुन से नहलाया..फ़िर पोंछा..बाद मे उसने अपने कपड़े वैसे ही एक थैली मे भरे और मम्मी की साड़ी पहन कर चली गई..जाते वक्त उसने फ़िर से कहा की मेरे घर आ कर तुम मुझे जब चाहे तब चोद सकते हो..और ऐसे ही चुदाई मे वो एक बार गर्भवती हो गयी..बाद मे उन्होंने कहा की इसे मैं जन्म दूँगी ये तुम्हारे धमाकेदार चुदाई की निशानी है..वो दुसरे शहर मे एक साल तक जा कर रही और बाद मे मेरे बेटे को साथ ले कर आयी...शायद मेरे मम्मी और डैडी को ये बात उसने बता दी थी इसलिए कभी कभी वो बाहर जाते वक्त मुझसे कहते आज रेखा को बुला लेना..
--The End--
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02-16-2008, 04:05 AM
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2. दीया की दास्तान
दीया ने अपने चहरे पर आते हुए अपने बलों को हटाया और कंप्यूटर
में रिपोर्ट तैयार करने में जूट गयी. दीया को चार साल हो गए
थे वीकास & बीरम के साथ काम करते हुए. वीकास & बीरम देश की मानी हुई
लौ फर्म थी. दीया की ये नौकरी अपनी महनत और लगन से हासील हुई
थी. काम का बोझ इतना ज्यादा था की कभी कभी तो उसे १५ घंटे तक
कम करना पड़ता था.
वो पूरी महनत से काम कर रही थी और उसके
ल्कशय अपनी मेहनत से फर्म का partner बन्ने का था. उसकी गहरी
नीली आँखें कंप्यूटर सक्रीन पर गाडी हुई थी की उसकी सेक्रेटरी ने
उसे आवाज़ दी,
"दीया वीकास Sir अपने कैबीन में तुमसे मिलना चाहेंगे."
दीया ने मुड़कर सेक्रेटरी की तरफ देखा, "क्या तुम्हे पता है वो कीस
विषय में मिलना चाहते है?.
"नहीं मुझे सिर्फ इतना कहा की में तुम्हे ढूंद कर उनसे मिलने को
कह दूँ" सेक्रेटरी ने जवाब दीया.
"शुक्रीया , में अभी उनसे मील कर आती हूँ. मेरा जाने की बाद
मेरे कैबीन को बंद कर देना," इतना कहकर वो कमरे मे लगे शीशे की
सामने अपना makup ठीक करने लगी. Profession में होने की बावजूद
दीया अपने पहनावा का और दिखावे का पुरा ख़याल रखती थी. उसने
अपने पतले और सुंदर होंठों को खोल उसपर हलके गुलाबी रंग की
लिप्स्तीक लगायी. दीया ने फीर अपने सिल्क की टॉप को दुरुस्त कीया जो
उसकी भरी और गोल चूचियों को ढके हुए था. २८ साल की उम्र में
भी उसका बदन एक कालेज में पढ़ती लडकी की तरह था.
उसने अपनी हाई हील की संडल पहनी जो वो आफिस मे कभी नही पहन
की रखती थी. वो वीकास की कैबीन की और जाते हुए सोच रही
थी, "पता नही वीकास Sir मुझसे क्यों मिलना चाहते है, इसके पहले
ऐसा कभी नही हुआ है."
आफिस की हल से गुजारते हुए उसे पता था की सभी मर्द उसे ही घूर
रहे है. सबकी निगाहे उसके चुत्ड की गोलियां पे गाडी रहती थी. वो
हमेशा चाहती थी की उसकी लम्बाई ५"५ इंच से कुछ ज्यादा हो जाये.
इसी लिये वो हाई हील की संदले पहना करती थी.
दीया कैबीन की दरवाज़े पर दस्तक देते हुए कैबीन मे पहुंची. वीकास
ने उसे बैठने की लीये कहा.
"दीया Mr नीखील की केस में कुछ प्रॉब्लम क्रिएट हो गयी है." वीकास ने
कहा.
दीया वीकास की बात सुनकर चौंक पडी. Mr नीखील हज़ारों करोड़ रूपए की
एक मेडिया कंपनी की mallik थे. Mr नीखील की कंपनी वीकास की कंपनी
की बडे ग्राहकों में से थी बल्की उनकी सिफारिश से भी कंपनी को
काफी business मीलता था. दीया पिछले एक साल से Mr नीखील की कंपनी
की टीवी और रेडियो स्टेशन की लाइसेंस को govt से रेनेव की काम मे लगी
हुई थी.
"दीया मुझे अभी अभी खबर मीली है की govt शायद Mr नीखील की
रेनेवाल ऍप्लिकेशन को रद्द कर दे कारण उनकी ऍप्लिकेशन में बहोत
सी बातों का खुलासा करना रह गया है." वीकास ने घूरते हुए उसकी
तरफ देखा.
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02-16-2008, 04:08 AM
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दीया घबरा गयी. उसने पुरे साल भर महनत करके सब applications
तैयार की थी. उसे याद नही आ रह था की उससे गलती कहां हुई है
पर वीकास की ग़ुस्से से भरे चहरे से पता चल रह था की गलती
कहीं ना कहीँ तो हो चुकी है.
वीकास ने उसे थोडा नम्र सवर में कहा, "देखो दीया मुझे पता है
की तुमने काफी महनत से ये applications तैयार की थी. मैं हमेशा
से तुम्हारी महनत और लगन का कायल रह हूँ. पर कभी कभी
गल्तियन घर चल कर आ जाती है.
दीया जानती थी की ये बात कहां जाकर ख़त्म होगी, "Sir अगर इस
गलती का दण्ड कीसी को मिलना है तो वो मुझे मिलना चाहिऐ, क्यों की
सही applicantions तैयार करने की जिम्मेदारी मेरी थी और में ही
अपना कम अच्छी तरह नही कर पायी."
दीया ने हिम्मत से ये कह तो दीया था, पर वो जानती थी की इससे उसका
भविष्य बर्बाद हो जाएगा. जो सपने उसने इस कंपनी की साथ रहते
हुए देखे तो वो सब चूर हो जायेंगे और शायद उसे कीसी दुसरी
कंपनी मैं भी नौकरी नही मिलेगी.
तभी वीकास ने उसपर दुसरी बीजली गिरायी.
"दीया जैसे तुम्हे पता है की ऍप्लिकेशन पर तुम्हारे और Mr नीखील की
दस्तखत है, Department वाले सोच रहे है की जानबूझ कर
ऍप्लिकेशन मे कुछ बातें चुपई गयी है. और इस वजह से तुम
दोनो को हिरासत मे भी लीया जा सकता है और मुकदमा भी चल सकता
है."
दीया ये सुन कर देहल गयी. उसकी आँखों मैं देह्शत की भव आ
गए. उसकी बदनामी, गिरफ्तारी मुकदमा सब सोच वो डर गयी. कोई बात
खुलासा करना रह गयी वो fraud कैसे हो सकता है, "Sir आप तो
जानते हैं की मैंने ये सब जन बुझ कर नही कीया, गलती ही से रह
गया होगा." वो रोने लगी, "Sir आप ही बताये मैं कया करूं?"
"मैं जनता हूँ की तुम एक मेहनती और इम्मान्दर औरत हो. पर पहले
हमे Mr बीरम की चीनता करनी चाहिऐ. अगर govt ने हमरी फर्म और Mr
नीखील को जिम्मेदार ठहरा दीया तो हम सब बर्बाद हो जायेंगे."
वीकास ने अपनी बात जरी रखी, "एक काम करो तुम अपने कैबीन मैं
जाकर शांती से बैठ जाओ, और इस बात का जीकार कीसी से भी नही
करना. ये बहोत ही नाजुक मामला है अगर एक शब्द भी लीक हो गया तो
हम बर्बाद हो जायेंगे."
दीया ने सहमती मैं अपनी गर्दन हीला दी.
"अपने कैबीन मे जाओ और मेरे फ़ोन का इंतज़ार करो. मैं Mr नीखील से
contact कर्ता हूँ उसे सारी बात समझाता हूँ फीर सोचते है की हमे
कया करना चाहिये." वीकास ने कहा.
दीया वापस अपने कैबीन मे पहुंची. उसका दिमाग काम नही कर रह था
की वो कया करे. उसे पता नही था की अगर वो गिरफतार हो गयी तो
उसका मंगेतर आगे उससे रिश्ता रखेगा की नही. वो अपनी कुर्सी पर
बैठ बहार देखने लगी. उसे महसूस हुआ की उसका शारीर डर की मरे
कांप रह था.
करीब एक घंटे की लंबे इंतज़ार की बाद वीकास का फ़ोन आया, "दीया
नीखील एक कोन्फेरेंस की सिलसिले मे होटल Ambassodar की सुइट नो १५०४ मे
है. उसने तुम्हे तुरंत ऍप्लिकेशन की कापी लेकर बुलाया है. तुम
तुरंत चली जाओ मैं थोड़ी देर मैं आता हूँ.
"ठीक है Sir मैं अभी चली जाती हूँ."
फ़ोन पर थोड़ी देर खामोशी छायी रही.
"दीया तुम्हे पता है ना की ये मीटींग हमारी फर्म की लीये कितनी
महत्वपूर्ण है. थोड़ी और खामोशी की बाद, "और तुम्हारे लीये भी."
दीया ने वीकास को बताया की उसे पता है.
कम्पती हुई दीया ने फ़ाइल उठाई और होटल Ambassodar की और चल दी
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02-16-2008, 04:09 AM
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करीब डेढ़ घंटे की बहस की बाद भी दीया Mr नीखील को ये नही
समझा पायी की उससे गलती कैसे और कहां हुई. और ये बात नीखील को
झाल्लय जा रही थी आखीर वो ग़ुस्से मे बरस पड़ा.
"कया तुम मुझे ये बताना की कोशीस कर रही हो की तुम्हे ये नही पता
की क्या और कौनसी बातें ऍप्लिकेशन मे छूट गयी है. मैं ही
बेवकूफ था जो इतने महत्वपूर्ण काम पर वीकास और बीरम पर भरोसा
कीया. कया तुम कोई जवाब दे सकती हो?" नीखील ग़ुस्से मैं जोर से बोला.
दीया की आँखों मे आंसू आ गए. आज तक नीखील ने उसे बहोत इज्जत और
आचे व्यव्हार से treat कीया था. ४५ साल का नीखील एक कसरती बदन का
मर्द था. वो ग़ुस्से मैं अपने हाथ का मुक्का बाना दुसरी हथेली पे मर
रह था जैसे की एक ही वार मे दीया को मर गिरयेगा.
नीखील ने दीया की और देख अपने आप से कह रह था, "क्या बदन है
इसका. भरी भरी चुचीयां और इतनी पतली क़मर. पता नही बिस्तर
मे कैसी होगी." जब दीया पपेर्स से बहरी टेबल पर juhki तो नीखील को
उसकी लंबी टंगे और बडे बडे कुल्हों की झलक मीली. "थोड़ी देर मे
ही इसकी गांड ऐसी मरुंगा की ये याद रखेगी."
"दीया मैंने अपने criminal लाव्येर से बात कर ली है, उसका कहना है
की अगर मैंने तुमपे और तुम्हारी फर्म बे भरोसा करके sign कीए है
तो मुझ पर कोई इलज़ाम नही आता है. अब तुम फंस चुकी हो मैं नही.
मुझे टेंशन है की मेरा करोडों का नुकसान हो जाएगा." नीखील ने उसे
घूरते हुए कहा.
"मैं समझ सकती हूँ Sir." दीया अपनी गर्दन झुकाते हुए बोली.
"क्या समझती हो तुम, की तुम्हारी जैसी नासमझ वकील की वजह से
मैं अपना करोड़ों का नुकसान होने दूंगा. याद रखना तुम की अगर मेरा
एक पैसे का भी नुकसान हुआ तो मैं तुम्हारी पूरी लौ फर्म बंद करवा
दूंगा."
"Sir मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ." दीया गिदगीदते हुए
बोली, "Sir कुछ भी जो आप कहे."
नीखील थोड़ी देर तक कुछ सोचता रह, "ठीक है मैं अपने criminal
लाव्येर से बात कर्ता हूँ की वो तुम्हे कैसे बचा सकता है. जब तक
मैं बात कर्ता हूँ तुम एक कम करो अपने कपडे उत्तर कर नंगी हो जाओ
और मेरे लंड को चूसो. सिर्फ इसी तरह तुम मेरी मदद कर सकती हो."
दीया पठार की बुत बन कर खडी थी. नीखील फ़ोन पर अपने वकील से
बात कर रह था, "हाँ वो तो फंसेगी ही पर उसकी फर्म को भी काफी
नुकसान होगा, क्या कोई तरीका नही है की इन सबसे छुटकारा मील सके?"
"थोडा उसकी उम्र और उसके भविषय का ध्यान दो, बेचारी मर जायेगी.
उसकी फर्म की बारे मैं सोचता हूँ की मुझे क्या करना चाहिऐ. हाँ
वो इस समय मेरे पास ही खडी है."
"क्या तुम ये कहना चाहते हो की अब उसका और उसकी फर्म का भविष्य
मेरे हाथ मैं है तो ठीक है मैं सोचूँगा की इस लडकी को इस
समास्य से बचाना चाहिऐ की नही."
नीखील दीया को घूरे जा रह था, जैसे वो उसके आगे बढने का
इंतज़ार कर रह हो. नीखील होटल की कुर्सी पे अपने दोनो टांगो को
फैलाये बैठा था.
अपने आपको भविषय की सहारे छोड़ते हुए दीया ने अपनी ज़िंदगी की
राह मैं अपना पहला कदम बढ़ा दीया. उसने गहरी संस् लेते हुए अपने
हाथ अपने टॉप की उप्पेर की बटन पर रखे और बटन खोलने लगी.
थोड़ी ही देर मैं उसका टॉप खुल गया और उसने उसे अपने कंधों से
निकाल उसे उतर दीया. फीर उसने अपने skirt की हुक खोल उसे नीचे गीरा
दीया. अपनी हाई हील्स की संडल निकल उसने skirt को उतरा और सिर्फ
ब्रा और पैंटी मैं नीखील की सामने खडी थी.
दीया नीखील को देख रही थी की उसकी और से कोई प्रतिक्रिया हो पर वो
वैसे ही अपनी कुर्सी पर बैठा रह.
दीया सोच रही थी की आगे वो क्या करे इतने मैं नीखील ने फ़ोन की
माउथ पीस पर हाथ रख कर कह, "अब तुम किसका इंतज़ार कर रही
हो. जल्दी से अपनी पैंटी और ब्रा उतार की मेरे पास आओ."
दीया ने अपनी ब्रा की हुक खोल अपनी ब्रा उतार दी. उसकी गोल गोल
चुचीयां बहार निकाल पडी. फीर उसने अपनी पैंटी को नीचे कर उत्तर
दी. उसने देखा की नीखील उसकी छूत को घूर रह था. उसने अपने
मंगेतर की कहने पर कल ही अपनी छूत की बल बारीकी से तराशे
थे. उसे शरम आ रही थी की आज कोई मर्द उसकी चूत को इस तरह
घूर रह है.
नीखील अभी भी फ़ोन पर बात कर रह था. वो अपनी कुर्सी से उठा और
दीया को देख अपनी पैंट की ज़ीप की और इशारा कीया. दीया उसके पास
आ घुटनों कल् बैठ गयी. फीर उसने उसकी पैंट की बटन खोलें और
उसके सुस्ट पडे लंड को अपने हाथों मैं ले लीया.
फीर अपने होंठों को खोल अपनी जीभ से उसके लंड की सुपडे को
चाटने लगी.
दीया ने आज से पहले अपने मंगेतर की सिवी कीसी और की लंड को
नही चूसा था. अपने मंगेतर की भी सिर्फ़ एक बार जब वो काफी नशे
मैं हो गया था और उसे चूसने की जिद कित ही. पर आज उसके पास कोई
चारा नही था. उसने अपना पुरा मुँह खोल नीखील की लंड को मुँह मैं ले
लीया और चूसने लगी. उसकी जीब का स्पर्श पते ही लौडे मे जान आ
गयी और वो दीया की मुँह में पुरा तन गया.
नीखील ने अपनी पैंट नीचे खासका दी. दीया एक हाथ से उसके लंड को
पकड़े हुए थी और अपने मुँह को ऊपर नीचे कर रही थी जैसे कोई
लोलीपोप चूस रही हो. नीखील ने हाथ बढ़ा उसकी चुचीयों की निप्पले
को अपने अंगूठे और ऊँगली में ले भिनचने लगा. उसके छूते ही
निप्प्ले में जान आ गयी और वो खडी हो गए.
नीखील ने फ़ोन पर बात करना जरी रखा.
Continue..........
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02-16-2008, 04:11 AM
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"दीया नाम है उसका. हाँ यार तुम जानते हो उसे वही जीस्ने लौ
exam मे state में टॉप कीया. हाँ अरे वो यहीं है इस वक्त
मेरे लंड को चूस रही है तुम्हे क्या लगता है में मजाक कर
रहा hu.थोड़ी देर मे में उसकी चूत चोदने वाला हूँ.
नीखील की बातें सुनकर दीया का चेहरा शर्म से लाल हो गया. फीर भी
वो जोरो से उसके लंड ko चूस रही थी. वो जानती थी की उसके पास बस
एक यही उपाय है अपने आप को इस मुसीबत से बचने का. उसने लंड
चूसना जरी रखा.
नीखील ने फ़ोन नीचे रखा और अपने दोनो हाथ दीया की Sir पर रख
अपने लंड को और उसके गले तक डाल दीया. उसकी बढती हुई सांसो की
देख दीया समझ गयी की उसका लंड अब पानी छोड़ने वाला है.
"हाआआआन् चूओसो ओह्ह्ह्ह्छ और जोर सीईईईए चूओसो" नीखील अपने
लंड को और अन्दर तक घुसेड बाद्बदा रह था.
दीया एक हाथ से उसके लंड की गोलीयों को सहला रही थी और दुसरे
हाथ से उसके लंड को पकड़े चूस रही थी. थोड़ी देर में नीखील का
लंड अकड़ना शुरू हो गया. नीखील ने अपने दोनो हाथों का दबाव दीया की
Sir पर रख अपने लौडे को और उसे गले तक डाल दीया और अपने वीर्य
की पिचकारी छोड दी.
दीया ना चाहते हुए उसके लंड से नीकला पुरा पानी गटक गयी. नीखील
अपने लंड को उसके मुँह मे तब तक अन्दर बहार कर्ता रह जब तक की
उकसा लंड थोडा ढीला नही पड़ गया. दीया उसके लंड को अपने मुँह से
निकलने को डर रही थी कही वो नाराज़ ना हो जाये पर नीखील ने अपना
लंड उसके मुँह से निकाल लीया. उसके लंड की निकलते ही उसके पानी की
धार दीया की चहरे से होती हुई उसकी छाती और टांगो पर चु पड़ी.
तभी फ़ोन की घंटी बजी और नीखील फ़ोन उठा बात करने लगा. बात
करते हुए उसने दीया को उसके कंधों से पकड़ खड़ा कर दीया. नीखील ने
उसे घुमा कर इस तरह खड़ा कर दीया की दीया की पीठ उसकी तरफ
थी.
फ़ोन पर बात करते हुए नीखील पिछे से अपने हाथ उसकी छाती पर रख
उसके ममे मसल रह था. दीया ने महसूस कीया की उसका लंड उसके
गांड की दरारों पर रगड़ खा रह है. नीखील उसके कान मे धीरे से
बोला, "जाओ जाकर बिस्तर पर लेट जाओ, अब में तुम्हे चोदुंगा."
जैसे ही दीया बिस्तर की और बढ़ी नीखील उसके बदन को घूरे जा रह
था. क्या पतली क़मर है और क्या गोल गोल चुत्ड. उसने ऐसे बदन
ज्ञ्म मे कई देखे थे. उसके भरे चुत्तडों को देख कर नीखील की मुँह
में पानी आ रह था, "आज में इसकी गांड मर के रहूंगा." वो सोच
रह था.
दीया जैसे ही बिस्तर पर लगे कोवेर्स को हटाकर उसमे घुसने लगी
नीखील बोला, "दीया तुम बेड की ऊपर नंगी ही लेटी रहो में तुम्हारे
नंगे बदन को देखना चाहता हूँ."
नीखील उसे घूरे जा रह था. वो जनता था की दीया आज हर वो कम
करेगी जो वो कहेगा. उसकी उभरी और भरी हुई चुचीयां फीर एक बार
उसके लंड मे जान फूंक रही थी.
पिछले आधे घंटे से नीखील दीया के ऊपर लेटा हुआ अपने भरी लंड को
उसकी चूत में अन्दर बहार कर रह था. दीया की दोनो टंगे नीखील की
क़मर से लिपटी हुई थी. नीखील अपने हाथों से उसके दोनो चुत्त्डों को
पकड़े हुए था और अपने लंड को आधा बहार निकलते हुए पूरी ताकत से
उसकी चूत मे पेल रह था.
दीया के दोनो हाथ नीखील की पीठ पेर थे. और नीखील जब पूरी ताकत से
धक्का लगता तो दीया को अपना शारीर पीसता हुआ महसूस होता. वो
दीवाल पर लगे शीशे में देख रही थी की नीखील का भरी शारीर
कैसे उसके नाजुक बदन को रौंद रह था.
मन में डर और इस बेइज्जती के बावजूद अब उसके शारीर और टांगो ने
विरोध करना छोड दीया था. चुदाई इतनी देर चल रही थी की अब उसे
भी अनंद आ रह था. वो भी अपने कुल्हे उछाल उसका साथ दे रही
थी. उसे ऐसा लग रह था की नीखील का लंड नही बल्की उसके मंगेतर
का लंड उसे चोद रह है. जब भी नीखील का लंड उसकी चूत की ज़द पर
ठोकर मरता तो उसके मुँह से सिस्कारी निकाल रही थी, "ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्छ
आआआह्"
आखीर में नीखील का शारीर अकाद्ने लगा और उसने दीया को जोर से बाँहों
में भींचते हुए अपने लंड पुरा अन्दर डाल अपना पानी चोद दीया.
दीया ने भी सिस्कारियां भरते हुए उसके साथ ही पानी चोद दीया.
नीखील थोड़ी देर उसके बदन पर लेटा अपनी सांसो को काबू मे कर्ता रह
फीर पलट कर बिस्तर पर लेट गया. जैसे ही नीखील उसके शारीर से हटा
दीया बिस्तर से लड़खड़ाते हुए उठी और अपने कपडे ले बाथरूम मे
घुस गयी.
दीया अपने कपडे पहन बाथरूम से बहार आयी तो देखा की नीखील अभी
भी बिस्तर पर नंगा लेटा है और वो टीवी का remote पकड़े चैनल
बदल रह है.
"देखो इसे?" नीखील ने कहा.
दीया की नज़रें जैसे ही टीवी सक्रीन पर पड़ी उसने देखा की वो उसकी
और नीखील की चुदाई की फिल्म थी. नीखील ने उसके साथ चुदाई को पुरा विडेओ
टेप बाना लीया था.
"दीया" उसने कहा "आज से मे वीकास & बीरम कंपनी को अपने इशारों पर
नचा सकता हूँ. और साथ ही आज से तुम्हे हर वो कम करना है जो
में चाहूँगा."
दीया ये टेप देख घबरा गयी थी और अपनी कीस्मत को कोस रही थी
की वो कहां तो एक सफल वकील बन्ने आये थी और अब हालत उसे एक
वेश्या बाना रहे थे.
"तुम अपना टेलीफोन नो, घर का पता और मोबाइल नो लीख कर दे दो
और जब में तुम्हे बूलौं तुम्हे आना पड़ेगा." नीखील ने उसे घूरते हुए
कहा.
दीया समझ गयी थी की उसके पास कोई चारा नही था, इसलिए उसने
जल्दी से सब लीखा और लगभग बह्ग्टे हुए कमरे से बहार चली गयी.
नीखील के होंठों पर एक सफल मुस्कान थी.
दुसरे दीन दीया अपने आफिस पहुंच कर Mr. वीकास से मीली, "Sir
हालातों को देखते हुए Mr.नीखील के साथ कल् की मीटींग अच्छी गयी.
मुझे लगता है की समास्या का कोई ना कोई हल निकाल ही आएगा."
जो कुछ भी उसके और नीखील के बीच हुआ था वो उसने नही बताया और ना
ही टेप के बारे में. ये भी नही बताया की नीखील का फ़ोन सुबह आया
था और उसने कहा की आज से जब भी वो उससे मीले तो ब्रा और पैंटी ना
पहने.
Continue..........
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02-16-2008, 04:12 AM
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"मेरी Mr.नीखील के साथ थोड़ी देर मीएं मीटींग होने वाली है. दीया तुम
यही ऑफिस में रहना हो सकता है Mr नीखील को तुम्हारी ज़रूरत
पडे." वीकास ने उससे कहा.
दीया दरी और सहमी हुई अपने कैबीन मे पहुंची. उसे नीखील के रुतबे के
बारे में मालुम था और वो जानती थी की अगर उसने उसकी बात नही मानी
तो वो कुछ भी कर सकता था.
अपने कैबीन मे दखील होने से पहले वो साथ मे लगे बाथरूम मे गयी
और अपनी ब्रा और पैंटी उतार दी. उसने दीवार पर लगे शीशे मे अपने
आप को देखा तो शर्म गयी. उसके सिल्क के टॉप मे से उसकी ममे साफ
झलक रहे थे. उसके निप्पले साफ टॉप मे से बहार को निकलते दिखायी
पड़ रहे थे.
दीया ने जल्दी से अपनी ब्रा और पैंटी अपने हाथों में लीये दौड़ती
हुई अपने कैबीन मे वापस आ गयी. कैबीन में आने के बाद उसने अपना
buissness कोट पहन लीया जिससे उसके टॉप मे से चालाकती चुचीयों को
धंपा जा सके.
दीया अपनी कुर्सी पर बैठ कम करने की कोशिश कर रही थी पर
उसका सारा ध्यान Mr. नीखील और Mr. वीकास के बीच चल रही मीटींग पर
था. थोड़ी देर बाद Mr वीकास का फ़ोन आया, "दीया Mr नीखील तुमसे अभी
तुम्हारे कैबीन मे मिलना चाहेंगे."
"ठीक है Sir उन्हें भेज दीजिए में इंतज़ार कर रही हूँ." दीया ने
जवाब दीया.
दीया अपनी कुर्सी पे चिंटित बैठी थी. हज़ारों ख़याल उसके दिमाग़
में घूम रहे थे. फीर भी वो पूरी कोशीश कर रही थी की वो
चहरे से चिनतित ना दिखे. थोड़ी देर में उसके कैबीन के दरवाज़े पर
दस्तक हुई और उसकी सेक्रेटरी ने Mr नीखील के साथ अन्दर आयी. नीखील के
पीछे एक और vyakti कैबीन में दखील हुआ जीसे देख कर एक बार के
लीये दीया के थोड़ी रहत मीली.
नीखील ने उस vyakti को दरवाज़ा बंद करने के लीये कहा और दीया से
उसका परिचय कराया. "दीया ये Mr. अमीत मेरे दोस्त है जो Liscence
रेनेवाल Department मे काम करते है. इन्होने ही हमारी ऍप्लिकेशन
की गलतीयों को पकडा है. दीया ने एक मुस्कान के साथ उससे हाथ
मिलया.
Mr अमीत दिखने मे ही एक सरकारी मुलाजिम लग रह था. पुरानी स्टाइल
के कपडे, बलों मे मन भर तेल और नाक पर मोटे कांच का चश्मा.
पर अपनी position की वजह से थोडा कठोर स्वाभाव का लग रह था.
दीया ने देखा की उसकी पैंट जो उसके पेट के नीचे लटक रही थी
शायद तब kahridi गयी थी जब उसकी साइज़ ३४ थी जो की आज लगभग
४० थी.
नीखील ने धीरे दीया से कहा, "दीया हम जीस विषय पर बात करने वाला
है उसमे थोडा समय लग सकता है."
दीया ने अपने सेक्रेटरी को फ़ोन लगाया, "मेरे आने वाले हर फ़ोन
को रोक देना, में Mr नीखील और Mr अमीत के साथ एक जरुरी मीटींग मे
हु."
"दीया Mr अमीत चाहते है की हम तीनो मीलकर इस समास्या का हल
निकाल ले. पर कीसी को मालुम नही होना चाहिऐ की हमने साथ में
मुलाक़ात की है. और मैंने इन्हें ये भी बता दीया है की सरे
ऍप्लिकेशन तुमने ही तैयार की है." नीखील ने मीटींग शुरू करते हुए
कहा.
करीब एक घंटे की बहस के बाद दीया को पता चला की अगर लाइसेंस
रेनेव नही हुए तो नीखील की कंपनी को कीतना घटा हो सकता है. Mr
अमीत अगर नै ऍप्लिकेशन बदल भी देते है पुरानी वाली से तो इन्हें
अपने और साथी को मीलाना होगा. जैसे जासी समय गुज़र राह था नीखील
के चहरे पर झालाहत के भव आते जा रहे थे.
"अमीत दीया को हमारी परास्थिती के बारे में अछि तरह मालुम है.
उसे ये भी मालुम है की गलती उससे हुई है. वो अच्छी तरह जानती है
की में इसकी कंपनी को बर्बाद कर सकता हूँ पर इन सब चीजों से
मेरा जो घटा होगा वो तो पुरा नही होगा ना." नीखील का ग़ुस्सा साफ
दिखायी दे रह था.
"दीया इस कंपनी के बोर्ड पर है और हमारी हर तरह से सहायता
करने को तैयार है. है ना दीया." मैंने हाँ में अपनी गर्दन हीला
दी.
नीखील ने अपना अगला कदम बढाया. वो खड़ा होकर दीया की डेस्क के पास
चहल कदमी करने लगा, "अमीत हमे इस काम को अंजाम देना है. तुम्हे
अछि तरह पता है की कैसे अंजाम दीया जता है."
फीर उसने दीया की तरफ देखा, "दीया जरा खडी हो जाओ."
दीया कम्पती टांगो पर उसकी बात मानते हुए खडी हो गयी.
नीखील चलता हुए दीया के पीछे आ गया और अमीत उसे घूरे जा रह
था. उस cororepati ने दीया का कोट उत्तरा दीया और उसके टॉप में से
झलकती चुचीयां साफ दिखायी देने लगी.
"अमीत मैंने इस गुदिया से कहा था की आज वो ब्रा नही पहने." दीया
के निप्पले अचानक ही तन गए थे. नीखील ने पीछे से उसके टॉप की ज़ीप
खोल दी और दीया पठार की मूरत बनी सहमी सी खडी थी. दीया की
निगाहें अमीत के चहरे पर टिकी थी जो हेरात से उसकी और घूर रह
था.
नीखील ने दीया के टॉप को उसकी दोनो बाँहों से अलग करते हुए उतार दीया.
अब वो क़मर से ऊपर तक पूरी तरह नंगी खडी थी. पता नही डर के
मरे या ठंड के मरे उसके निप्पले पूरी तरह से खडे थे.
नीखील ने पीछे से उसकी चुचीयों को मसलते हुए कहा, "अमीत तुम्हे नही
लगता की हम इस मामले को सुलझा लेंगे."
" Haan ॥ हाँ हम सुलझा लेंगे Mr नीखील आप चीनता ना करे." अमीत एक
भूके शिकरी की तरह दीया के बदन को घूरते हुए कहा.
"दीया तुम्हे नही लगता की हम इस दलदल से बहार आ जायेंगे." नीखील
ने उसके skirt के हूक को खोलते हुए कहा.
"हाँ Mr नीखील हम जरुर आ जायेंगे." दीया ने उसकी हरकतों का बीना
कोई विरोध करते हुए कहा.
दीया ने अमीत की और देखा जो कामुक निगाहों से उसके बदन को घूरे
जा रह था. थोड़ी देर मिएँ उसने उसका हाथ अपने चुत्ड पर रेंगते
हुए महसूस कीया. उसके एक चुत्ड पर नीखील हाथ फीर रह था और
दुसरे पर अमीत.
इतने मे नीखील ने अपनी एक ऊँगली दीया की चूत मे घुसा अन्दर बहार
करने लगा. दीया की निगाहें अपने कैबीन के दरवाज़े पर लगी हुई थी
और वो भगवन से प्रर्थना कर रही थी की उसके कैबीन मे कोई ना
आये. वो मेज़ का सहारा ले घोड़ी बन गयी थी.
दीया ने अपने पीछे कपड़ों की सुर्सुराहत सुनी. नीखील ने थोड़ी देर के
लीये अपने हाथ उसके चुत्ड से हटा अपनी बेल्ट को खोला और अपनी पैंट
के बटन खोल उसे नीचे सरका दीया. उसने अपने खडे लंड को दीया
की चूत के छेद पर टीका दीया.
"नही please नही." वो धीरे से बोली.
"अमीत हम ये मामला सुलझा कर रहेंगे. में जनता हूँ की जो लोग मेरे
लीये कम करते है वो हर हल में मेरा कहा मानेंगे." कहकर नीखील ने
अपने हाथों से उसके चुत्ड को थोडा फैलाया और अपने लंड को उसकी
चूत मे घुसा दीया. दीया के मुँह से एक चीख निकाल पड़ी.
नीखील ने अपना लंड थोडा बहार निकला और जोर के धक्के के साथ पुरा
लंड उसकी चूत मे डाल दीया. चीख की जगह एक सिस्कारी निकाल पड़ी
दीया के मुँह से.
"साली कुतिया अपनी टंगे फैला." नीखील ग़ुस्से में बोला, "जब तक तुम
अपनी टंगे नही फैलोगी में तुम्हारी चूत की जड़ तक कैसे अपना
लंड पेलुन्गा."
नीखील का आधा लंड उसकी चूत मे घुसा हुआ था, बड़ी मुश्किल से दीया
ने अपनी टंगे फैलायी. जैसे ही उसकी टंगे फैली नीखील ने उसे कंधों
से पकडा और जोर के धक्के लगाने लगा. उसके हर धक्के के साथ उसकी
चुचीयां उछाल रहीं थी.
नीखील ने उसकी एक चूची मसलते हुए जोर का धक्का मर अपना पानी उसकी
चूत मे छोड दीया. जब उसके लंड से एक एक बूंद नीकल चुकी थी तो
वो अपने लंड को बहार निकाल उसके चुत्ड पर रगड़ने लगा.
दीया ने थोड़ी रहत की संस् ली. नीखील वक़्त से पहले ही झाड़ गया था.
वो सीधी हो अपने कपडे पहने का विचार बाना ही रही थी की,
"तुम ये क्या कर रही हो?" नीखील ने पुछा.
"कपडे पहन रही हूँ और क्या." दीया ने जवाब दीया.
"ये अमीत के साथ नासिंसफी होगी दीया dear." नीखील ने जैसे ही ये
कहा दीया ने अमीत की तरफ देखा तो दंग राह गयी. अमीत अपने कपडे
उतार अपने लंड को सहला रह था और उसके नंगे बदन को देखे जा
रह था.
"तुम जहाँ हो वहीँ रुको?" नीखील ने जैसे उसे अग्या दी.
दीया के पास और कोई चारा नही था उसकी बात मानने के सिवा. वो उसी
अवस्था मे नंगी खडी रही, टेबल का सहारा लीये अपने गांड हवा
में उठाये हुए. नीखील के लंड से चूता पानी अभी उसकी जांघों पर बह
रह था. उसने टेबल से एक तिस्सुए पेपर लीया और पानी को पौंचने
लगी.
अमीत बीना कोई समय गंवय उसके पीछे आया और उसके चुत्ड चूमने
लगा. "मेरी जान अपनी टांगो को थोडा फैलाओ जिससे में अपना लंड
तुम्हारी चूत मे डाल सकूं." उसने अपन लंड दीया की चूत के मुहाने
पर रखा और एक ही धक्के मे अपना लंड उसकी चूत मे पेल दीया.
दीया ने महसूस कीया की उसका लंड नीखील के लंड जितना मोटा और लम्बा
नही था. दीया जानती थी उसका लंड उसे कोई नुकसान नही पहुँचा
सकता और ये भी जानती थी किया अगर उसे इस जील्लात से छुटकारा पाना
है तो वो मर्द के पानी को चुडा दे.
यही सोच कर दीया ने अपनी टांगो को थोडा सिकोडा और अपनी चूत मे
उसके लंड को जकड लीया. अब वो उसके हर धक्के का साथ अपने कुल्हों
को पीछे की और धकेल साथ दे रही थी.
अमीत ने अपने हाथ बढ़ा उसके ममे पकड़ लीये और उन्हें मसलते हुए
कास के धक्के मरने लगा.
दीया को अपने आप पर विश्वास नही हो रह था. वो हमेशा से ही एक
साधारण और संस्कृती को मानने वाली लडकी रही थी. और आज वो दीन
के समय अपने ही ऑफिस मे दो लंड से अपने आप को चुद्वा रही थी.
ऐसा नही था की इतनी भयंकर चुदाई उसे मज़ा नही दे रही थी पर
इस समय उसका ध्यान अमीत का पानी चुदाने पर ज्यादा था.
अमीत जोर की हुनकर भरते हुए दीया को चोदे जा रह था. दो तीन
कास के धक्के मरने के बाद उसके लंड ने दीया की चूत मे पानी छोड
दीया. जैसे ही उसने अपना मुर्जहया लंड बहार निकला उसके वीर्य की
बूंदे ऑफिस के कार्पेट पर इधर उधर गीर पड़ी.
Diya बड़ी मुश्कील से अपनी उखड़ी सांसो पर काबू प रही थी.
उत्तेजना मे उसका चेहरा लाल हो चूका था. बड़ी मुश्किल से उसने अपने
आप को संभाला और अपने कपडे पहने. उसने अपने कपडे पहने ही थे
की दरवाज़े पर दस्तक हुई, "क्या में अन्दर आ सकती हूँ?" दीया की
सेक्रेटरी ने पुछा.
बड़ी मुश्किल से दीया ने कहा, "हाँ आ जाओ."
दीया की सेक्रेटरी कैबीन मे आयी और दीया से पुछा की क्या वो खाने
का आर्डर देना चाहेंगी. दीया ने उसे मना कर दीया की मीटींग ख़त्म
हो चुकी है और खाने की ज़रूरत नही पडेगी. मगर वो जानती थी की
हवा मे फैली चुदाई की खुशबु और उसके मसले हुए बाल उसकी
सेक्रेटरी को सब कहानी कह देंगे.
दीया ने अपने आपको इतना अपमानित और गीरा हुआ कभी महसूस नही कीया
था. कीस तरह उसकी तकदीर उसके साथ खेल रही थी. एक इन्सान उसके
जज्बात और शारीर के साथ खेल रह था और वो मज़बूरी वश उसका
साथ दे रही थी. अब उसका एक ही मकसद था की किसिस तरह नीखील की हर
बात मानते हुए वो उससे वो टेप हासील कर ले जो उसने होटल के रूम मे
रेकॉर्ड कर ली थी. दीया की दास्तान
----The End------
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02-16-2008, 04:44 AM
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